औषधि के रूप में चौलाई के पंचाग यानि पांचों अंग जड़, डंठल, पत्ते, फल और फूल काम में लाये जाते हैं। इसकी डंडियों और पत्तियों में प्रोटीन, खनिज, विटामिन ए, सी प्रचुर मात्रा में है। इसका सेवन सब्जी या सूप के रूप में होता है। चौलाई पेट के रोगों के लिए गुणकारी है। इसमें रेशे, क्षार द्रव्य होते हैं, जो आंतों में चिपके हुए मल को निकालकर उसे बाहर धकेलते में मदद करते हैं। इससे पेट साफ होता है और कब्ज दूर होता है। पाचन संस्था को शक्ति मिलती है। छोटे बच्चों को यदि इसका दो-तीन चम्मच रस दिया जाय, तो कब्ज दूर करता है। दूध पिलाने वाली माताओं के लिए यह उपयोगी है। अगर उन्हें दूध कम उतरता है, तो चौलाई के साग का सेवन करें। चौलाई की जड़ को पीसकर चावल के माड (पसावन) में डालकर, शहद मिलाकर पीने से प्रदर रोग ठीक होता है। जिन स्त्रियों को बार-बार गर्भपात होता है। उनके लिए चौलाई साग का सेवन लाभकारी है।
चूहे, बिच्छू, संखिया किसी की भी विष चढ़ गया हो, तो चौलाई का रस या जड़ का क्वाथ में काली मिर्च डालकर पीने से विष दूर हो जाता है।

लोड हो रहा है...