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पीलिया रोग

वर्षा ऋतु आते ही हमारे आसपास गंदगियां फैल जाती है। इससे अनेक बीमारियां फैलने लगती है। इसमें से एक रोग है पीलिया। अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह भयंकर रूप धारण कर लेता है। कुछ सावधानी बरतने और घरेलू उपचार के माध्यम से इस रोग से बचा जा सकता है।

पीलिया के कारण –
मैदे की चीजे,अचार, सफेद चीनी का अधिक सेवन करने से, बाहर की चीजें खाने से जो स्वच्छ नहीं होती जिससे यकृत पर अधिक भार पड़ता है। और हमारा शरीर अधिक विकारों से भर जाता है। नतीजा यह होता है कि हम कब्ज के शिकार हो जाते हैं। कब्ज होने के कारण पाचन क्रिया सुस्त हो जाती है और यकृत ठीक से काम नहीं करता है।

पीलिया के लक्षण-
व्यक्ति चिड़चिड़ा हो जाता है और स्वाद में कड़वाहट आ जाती है। भोजन के प्रति रुचि नहीं रहती। नींद ठीक से नहीं आती। पीलिया होने पर मरीज के नख, मुख, त्वचा पर पीलापन आ जाता परिणामस्वरूप मरीज के उठने-बैठने, सोने से चादर और पहने वाले कपड़े पीले हो जाते है। शौच, सफेद, झागयुक्त पतला हो जाता है।

पीलिया उपचार के घरेलू नुस्खे -
1. मूली के पत्तों के रस में थोड़ी मिश्री मिलाकर सुबह-शाम पीयें।
2. एक गिलास मट्ठे में एक चुटकी काली मिर्च डालकर सेवन करें।
3.अनार के पत्तों को छाया में सुखायें। इसे पीसें तथा मट्ठे में मिलाकर पिलाऐं।
4.नीम के पत्ते, छाल, निबोली सुखाकर चूर्ण बनाऐं। इस चूर्ण को शहद के साथ लें।
5. बेल के पत्ते को पीसकर रस निकालें। इसमें एक चुटकी काली मिर्च पाउडर डालकर सुबह-शाम पीयें।
6. संतरे का रस पीना भी लाभकारी है।
7. चुकंदर के रस में थोड़ा सा नींबू डालकर पीयें।
वर्षाक्षृतु मे होने वाली बीमारियो ने लोगो का जीना हराम किया है
पेट से जुडी बीमारियो ने लोगो को परेशान कर दिया है ,कालरा,डायरिया,पीलिया,अतिसार ,मलेरिया जैसी बीमारियो से पीडित लोगों की भर मार है ।हर घर का सदस्य इससे परेशान है यहां तक कि डा. का भी कहना है कि इससे बचाव के लिये खान पान में सफाई पर बहुत ध्यान देना जरूरी है।बारिश के मौसम मे खासतौर पर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है एसे में दूषित पानी ,या खाने पीने की चीजों से होने वाली पेट की बीमारियो के अलावा और कई बीमारियो का खतरा बढ जाता है ।
साथ साथ बरसात मे मच्छरों के कारण होने वाले रोग भी पनपते है जैसे मलेरिया ,वायरल, तमाम तरह के इनफेक्शन, अस्थमा, जैसी बीमारियां भी सर उठाती है कारण दमा के मरीज को फंगस की समस्या हो जाती है व फेफडे में इंनफेक्शन हो जाता है पेट से जुडी बीमारियों का कारण है खानपान में लापरवाही बरतना ।
बारिश में भीग जाने की वजह से सरदी, खांसी,जुकाम,खुजली,दाद का होना या बढना पसीना ना सूखने से ,भीग जाने पर पंखा या कूलर चलाना ।जहां तक मुमकिन हो गीले कपडे तुरंत बदले ।
जुकाम देखने में तो ,साधारण लगता है पर रोगी परेशान हो जाता है ,जुकाम से नींद न आना ,सर दर्द,बदनदर्द,नाक बंद होना जैसी परेशानियों का ,सामना करना पडता है
वर्षा क्षृतु से होने वाली कुछ परेशानियों से बचा जा सकता है
वर्षा क्षृतु में होने वाले सर्दी जुकाम से बचने के उपाय
-स्टीम लेकर गले पर कपडा लपेटें
-हल्के गरम पानी से स्नान करे
-नमक मिले गुनगुने पानी से गरारा करे

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